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आधुनिक काल: भारतेंदु से नई कविता तक

By ExamAtlas · 29/8/2026

आधुनिक काल: भारतेंदु से नई कविता तक

आधुनिक काल से 2 प्रश्न आते हैं और यह भाग युगों के क्रम पर टिका है। भारतेंदु युग से नई कविता तक की धाराएँ, उनके वर्ष और प्रवर्तक — यही तीन चीज़ें पूछी जाती हैं, इसलिए क्रम को समयरेखा की तरह याद कीजिए।

आधुनिक काल की धाराएँ

युग या धारालगभग समयप्रमुख नाम
भारतेंदु युग1868 से 1900भारतेंदु हरिश्चंद्र
द्विवेदी युग1900 से 1920महावीर प्रसाद द्विवेदी, मैथिलीशरण गुप्त
छायावाद1918 से 1936प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी
प्रगतिवाद1936 सेनागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल
प्रयोगवाद1943 सेअज्ञेय, तार सप्तक
नई कविता1954 सेजगदीश गुप्त, धर्मवीर भारती

भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिक हिंदी साहित्य का जनक कहा जाता है। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती पत्रिका के संपादन से खड़ी बोली को काव्य की भाषा बनाया, इसलिए उनके नाम पर पूरा युग है।

✗ छायावाद के प्रवर्तक भारतेंदु हरिश्चंद्र हैं  |  ✓ भारतेंदु आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक हैं; छायावाद बहुत बाद की धारा है

छायावाद के चार स्तंभ

कविप्रमुख रचनाएँ
जयशंकर प्रसादकामायनी, आँसू, लहर, झरना
सूर्यकांत त्रिपाठी निरालाराम की शक्तिपूजा, सरोज स्मृति, परिमल
सुमित्रानंदन पंतपल्लव, वीणा, चिदंबरा
महादेवी वर्मानीहार, रश्मि, नीरजा, यामा

कामायनी छायावाद का सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य माना जाता है और महादेवी वर्मा को उनकी वेदना प्रधान कविता के कारण आधुनिक मीरा कहा जाता है। निराला को छंद के बंधन तोड़ने के लिए मुक्त छंद का प्रवर्तक माना जाता है।

प्रयोगवाद और नई कविता

प्रयोगवाद की शुरुआत 1943 में तार सप्तक के प्रकाशन से मानी जाती है, जिसका संपादन अज्ञेय ने किया और जिसमें सात कवियों की रचनाएँ थीं। नई कविता 1954 के आसपास इसी से आगे बढ़ी और उसने आम आदमी के छोटे-छोटे अनुभवों को कविता का विषय बनाया।

क्रम याद रखने का सूत्र: भारतेंदु ने गद्य दिया, द्विवेदी ने खड़ी बोली दी, छायावाद ने कल्पना दी, प्रगतिवाद ने समाज दिया, प्रयोगवाद ने नया शिल्प दिया और नई कविता ने आम आदमी को कविता में जगह दी।

TRE संकेत: तार सप्तक 1943, संपादक अज्ञेय लगभग तय प्रश्न है। छायावाद के चार स्तंभ और उनकी एक-एक प्रमुख रचना याद रखिए — कामायनी प्रसाद की, यामा महादेवी की। भारतेंदु आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक और निराला मुक्त छंद के प्रवर्तक — ये दोनों उपाधियाँ भी पूछी जाती हैं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • भारतेंदु हरिश्चंद्र आधुनिक हिंदी साहित्य के जनक कहलाते हैं।
  • द्विवेदी युग में खड़ी बोली काव्य की भाषा बनी; सरस्वती पत्रिका का योगदान रहा।
  • छायावाद के चार स्तंभ — प्रसाद, निराला, पंत और महादेवी वर्मा।
  • कामायनी जयशंकर प्रसाद का महाकाव्य है; महादेवी आधुनिक मीरा कहलाती हैं।
  • निराला को मुक्त छंद का प्रवर्तक माना जाता है।
  • प्रयोगवाद 1943 के तार सप्तक से शुरू हुआ, संपादक अज्ञेय थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तार सप्तक क्या है और इसका महत्व क्यों है?

यह 1943 में प्रकाशित एक काव्य संकलन है, जिसका संपादन अज्ञेय ने किया और जिसमें सात कवियों की रचनाएँ संगृहीत थीं। इसी के प्रकाशन से प्रयोगवाद की शुरुआत मानी जाती है, इसलिए वर्ष और संपादक दोनों परीक्षा में पूछे जाते हैं।

छायावाद के चार स्तंभ कौन हैं?

जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा। इनकी प्रमुख रचनाएँ क्रमशः कामायनी, राम की शक्तिपूजा, पल्लव और यामा हैं। चारों नाम और एक-एक रचना साथ याद रखने पर अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।

महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा क्यों कहा जाता है?

क्योंकि उनकी कविता में मीराबाई जैसी गहरी वेदना और विरह भावना मिलती है, यद्यपि उनका स्वर आधुनिक और वैयक्तिक है। नीहार, रश्मि, नीरजा और सांध्यगीत उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं और यामा उनका प्रसिद्ध संग्रह है।

द्विवेदी युग का सबसे बड़ा योगदान क्या रहा?

खड़ी बोली को काव्य की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना। इससे पहले कविता प्रायः ब्रजभाषा में लिखी जाती थी। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती पत्रिका के संपादन के माध्यम से भाषा को परिष्कृत किया और लेखकों को अनुशासित लेखन की ओर मोड़ा।

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