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शिक्षा नीति एवं बाल अधिकार: RTE एवं NEP 2020

By ExamAtlas · 29/8/2026

शिक्षा नीति एवं बाल अधिकार: RTE एवं NEP 2020

शिक्षक भर्ती के पत्र में यह विषय सामान्य से अधिक भार रखता है और 1 से 2 प्रश्न देता है। संवैधानिक आधार, RTE अधिनियम की धाराएँ और NEP 2020 का ढाँचा — तीनों में संख्याएँ तय हैं और वही पूछी जाती हैं।

संवैधानिक आधार

अनुच्छेद 21A छह से चौदह वर्ष के बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाता है। इसे 86वें संशोधन, 2002 ने जोड़ा।

इसी संशोधन ने अनुच्छेद 45 को बदलकर छह वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखभाल और शिक्षा तक सीमित कर दिया, और अनुच्छेद 51A(k) के रूप में माता-पिता का यह कर्तव्य जोड़ा कि वे बच्चे को शिक्षा का अवसर दें।

✗ शिक्षा का अधिकार शुरू से ही मौलिक अधिकार था  |  ✓ यह 2002 में 86वें संशोधन से मौलिक अधिकार बना; पहले यह नीति निर्देशक तत्व था

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009

बिंदुप्रावधान
लागू1 अप्रैल 2010
आयु वर्ग6 से 14 वर्ष
धारा 12(1)(c)निजी विद्यालयों में 25% सीटें दुर्बल वर्ग के लिए
धारा 16निष्कासन एवं अनुत्तीर्ण न करने का प्रावधान
धारा 17शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर रोक
धारा 24शिक्षक के कर्तव्य

धारा 17 शिक्षक उम्मीदवार के लिए सबसे सीधी है — शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। यह प्रश्न लगभग हर शिक्षक भर्ती पत्र में किसी न किसी रूप में आता है।

अनुत्तीर्ण न करने की नीति में बदलाव — यही ताज़ा हिस्सा है

यहीं बाज़ार की अधिकांश सामग्री पुरानी है। मूल RTE में आठवीं तक किसी को अनुत्तीर्ण नहीं किया जा सकता था। पर 2019 के संशोधन ने धारा 16 बदल दी — अब राज्य पाँचवीं और आठवीं में नियमित परीक्षा करा सकते हैं, और अनुत्तीर्ण होने पर बच्चे को दो माह का अतिरिक्त अवसर देकर पुनः परीक्षा ली जाती है; तब भी न होने पर उसे रोका जा सकता है।

यानी अब यह कहना ग़लत है कि आठवीं तक कोई अनुत्तीर्ण नहीं होता। यह बदलाव नया है और पुरानी किताबें अब भी पुराना नियम छाप रही हैं — यहीं आपको बढ़त मिलती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

  • यह 1986 की नीति के बाद पहली नई शिक्षा नीति है।
  • विद्यालयी ढाँचा अब 5 + 3 + 3 + 4 है, जो 3 से 18 वर्ष की आयु को समेटता है।
  • आधारभूत स्तर पाँच वर्ष का है — तीन वर्ष आँगनवाड़ी और कक्षा 1-2।
  • मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षण कम से कम कक्षा 5 तक, यथासंभव 8 तक।
  • NIPUN भारत मिशन आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मकता के लिए है।

संख्या ठीक से याद रखिए — 5 + 3 + 3 + 4, कुल पंद्रह वर्ष। यह क्रम उलटकर या 5+3+3+3 लिखकर विकल्पों में जाल बनाया जाता है।

तीन तारीखें जोड़े में याद कीजिए — 2002 में अनुच्छेद 21A, 2009 में RTE अधिनियम, 2010 में उसका लागू होना, और 2020 में नई शिक्षा नीति।

TRE संकेत: 2019 का अनुत्तीर्ण न करने वाला संशोधन इस विषय का सबसे ताज़ा और सबसे कम पढ़ा गया हिस्सा है — बाज़ार की सामग्री अब भी पुराना नियम छाप रही है। धारा 17 का शारीरिक दंड प्रतिबंध और धारा 12(1)(c) का 25 प्रतिशत दो तय प्रश्न हैं। NEP का ढाँचा 5+3+3+4 है, 5+3+3+3 नहीं।

60 सेकंड का रिवीजन

  • अनुच्छेद 21A 86वें संशोधन 2002 से जुड़ा; आयु वर्ग 6 से 14 वर्ष।
  • RTE अधिनियम 2009 में बना और 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ।
  • धारा 12(1)(c) निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करती है।
  • धारा 17 शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर रोक लगाती है।
  • 2019 के संशोधन के बाद पाँचवीं और आठवीं में परीक्षा और रोक संभव है।
  • NEP 2020 का विद्यालयी ढाँचा 5 + 3 + 3 + 4 है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या आज भी आठवीं तक किसी बच्चे को अनुत्तीर्ण नहीं किया जा सकता?

नहीं, यह नियम बदल चुका है। 2019 के संशोधन के बाद राज्य पाँचवीं और आठवीं कक्षा में नियमित परीक्षा करा सकते हैं। अनुत्तीर्ण होने पर बच्चे को दो माह का अतिरिक्त अवसर देकर पुनः परीक्षा ली जाती है, और तब भी न होने पर उसे उसी कक्षा में रोका जा सकता है।

RTE की धारा 17 क्या कहती है?

वह विद्यालय में शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न पर पूर्ण रोक लगाती है। यह प्रावधान शिक्षक के दैनिक आचरण से सीधे जुड़ा है, इसलिए शिक्षक भर्ती की परीक्षाओं में यह धारा किसी न किसी रूप में लगभग हर बार आती है।

NEP 2020 का विद्यालयी ढाँचा क्या है?

पाँच जोड़ तीन जोड़ तीन जोड़ चार, यानी कुल पंद्रह वर्ष, जो तीन से अठारह वर्ष की आयु को समेटता है। पहला आधारभूत स्तर पाँच वर्ष का है जिसमें तीन वर्ष आँगनवाड़ी और कक्षा एक तथा दो शामिल हैं। विकल्पों में पाँच जोड़ तीन जोड़ तीन जोड़ तीन भी रखा जाता है।

धारा 12(1)(c) का प्रावधान क्या है?

गैर-सहायता प्राप्त निजी विद्यालयों को अपनी प्रवेश स्तर की पच्चीस प्रतिशत सीटें दुर्बल वर्ग और वंचित समूह के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं, और उनकी शिक्षा नि:शुल्क होती है। राज्य सरकार इसकी प्रतिपूर्ति करती है।

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